पंचकुला । केन्दीय शिक्षा मंत्रालय ने पीजीटी हिन्दी की पदोन्नति सूचि में लेफ्टआउट रहे हिन्दी शिक्षकों के मामले पर प्रदेश के शिक्षा विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। भारत सरकार के सचिव आर के आर्य ने एडीशनल चीफ सेक्रेटरी को जारी निर्देश में कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय में 06 मई 2016 को जारी पीजीटी पदोन्नति सूचि के लेफ्टआउट हिन्दी शिक्षकों की शिकायत आई है। आप इन हिन्दी शिक्षकों के मामले में जांच करके तुरंत आवश्यक कार्रवाई करते हुए इसकी रिपोर्ट भेजें और इन प्रार्थी शिक्षकों को भी सूचित करें। शिक्षा विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी डॉ. महावीर सिंह से इस मामले में संपर्क किया तो उनसे बात नहीं हो सकी।

गौरतलब है कि वर्ष 2016 में पीजीटी पदोन्नति सूचि में लेफ्ट आउट रहे हिन्दी अध्यापकों ने गत दिवस प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, शिक्षा मंत्री कंवरपाल, सैकेंडरी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व निदेशक को पत्र भेजकर पीजीटी हिन्दी के लेफ्ट आउट की पदोन्नति सूचि को शीघ्र जारी करने की मांग की थी। विंडबना ये है कि जूनियर शिक्षक पांच वर्ष से पदोन्नति पाकर पीजीटी हिन्दी के पद पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन सीनियर हिन्दी शिक्षकों को बार-बार गुहार लगाने के बाद भी एंटीडेटेड पदोन्नति नहीं मिल रही है।

रोहतक निवासी डॉ. राजेश्वर ने जानकारी देते हुए बताया कि 19 अगस्त 2020 को उन्होंने वर्ष 2016 में पीजीटी पदोन्नति सूचि में लेफ्ट आउट रहे हिन्दी अध्यापकों की समस्या को पीएम ग्रीवेंश के माध्यम से भेजा था  जिस पर पीम कार्यालय की ओर से  शिक्षा विभाग को उचित और तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए। लेकिन विभाग द्वारा इन हिन्दी शिक्षकों की एंटीडेटेड पदोन्नति नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने 27 दिसंबर 2020 को दोबारा यह शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय भेजी। मेरी इस पीएम ग्रीवेंश पर कार्रवाई करते हुए केन्दीय शिक्षा मंत्रालय ने हरियाणा शिक्षा विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी को पीजीटी हिन्दी की पदोन्नति सूचि में लेफ्टआउट रहे हिन्दी शिक्षकों के मामले में जांच करते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रार्थी को भी इसकी पूर्ण जानकारी देने के लिए कहा है।

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यह है मामला :

शिक्षा विभाग ने 12 फरवरी 2014 को पत्र जारी कर पीजीटी पदोन्नति के लिए उन अध्यापकों के मामले भेजने के लिए कहा जो 01 जनवरी 2014 को हरियाणा स्टेट एजुकेशन स्कूल कैडर गु्रप बी सर्विस रूल-2012 के अनुसार योग्यता रखते हों। इसके बाद यही मामले पत्र क्रमांक 15/11-13 एचआरएल (4), दिनांक 19 जून 2015 व 26 जून 2015 के द्वारा भी मांगे गए। फिर 6 मई 2016 को पत्र क्रमांक : 15/18-2016 -पीजीटी-।। (3), के द्वारा पीजीटी हिन्दी की पदोन्नति सूचि जारी की गई। इस पदोन्नति सूचि में सीनियर हिन्दी अध्यापक रह गए जबकि कई जूनियर को पदोन्नति मिल गई। हालात ये है कि 2012 में ज्वाइनिंग करने  वाले हिन्दी शिक्षकों को पीजीटी हिन्दी पर पदोन्नति मिल गई और वर्ष 2000 में ज्वाइन करने वाले सीनीयर रह गए। पदोन्नति में लेफ्ट आउट ये हिन्दी शिक्षक पिछले 5 वर्ष से विभाग से बार-बार अपनी पदोन्नति की मांग कर चुके हैं, लेकिन उनका पदोन्नति का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है।

बार-बार पत्र जारी, लेकिन एंटीडेटेड पदोन्नति नहीं

विभाग द्वारा पीजीटी-वन शाखा के माध्यम से 2016 की पदोन्नति सूचि में लेफ्ट आऊट रहे हिन्दी शिक्षकों के पेंडिंग केस भी 31 जुलाई, 2 सितंबर और 15 अक्तूबर 2020 को पत्र भी जारी करके मांग चुका है। आखिरी पत्र में विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जिन लोगों के केस पेंडिंग रहेंगे, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सभी पेंडिंग केसों का निपटान होने के बाद इन लेफ्ट आऊट हिन्दी की पदोन्नति सूचि भी तैयार हो गई है, लेकिन लेफ्ट आऊट हिन्दी की पदोन्नति सूचि जारी करने की बजाय विभाग ने नए मांगे गए अन्य विषयों के पदोन्नति केसों पर कार्य शूरू कर दिया है।

भ्रष्टाचार के आरोप

डॉ. राजेश्वर ने कहा कि विभाग में 1 जनवरी 2014 को योग्यता रखने वाले लेफ्ट आउट इन हिन्दी अध्यापकों की एंटीडेटेड पदोन्नति सूचि तैयार है लेकिन इसको जारी नहीं किया जा रहा है। विभाग की कार्य प्रणाली संदेह के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा मिलीभगत के चलते जानबूझकर एंटीडेटेड पदोन्नति सूचि नहीं निकाली जा रही है। 2018 और 2019 में कुछ लेफ्टआउट हिन्दी टीचर की दो सूचियां जारी की गई जिसमें सिर्फ 12 लेफ्टआउट को ही पदोन्नति दी गई। इसमें भ्रष्टाचार का अंदेशा है कि कुछ लोगों को ही एंटीडेटेड पदोन्नति क्यों दी गई जबकि पांच साल से लगभग 100 से ज्यादा सीनियर हिन्दी टीचर प्रमोशन से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि विभाग के अनुसार एसीआर पूरी नहीं होने के कारण उनकी पदोन्नति पेंडिग रही है। एसीआर तो विभाग का इंटरनल मामला होता है,जब इतने लोगों की एसीआर पेंडिग थी तो प्रमोशन सूचि जारी क्यों की गई। फिर बाद में इन सिर्फ 12 लोगों की एसीआर कैसे पूरी हुई जो इन्हें एंटीडेटेड पदोन्नति दी। इस मामले में भ्रष्टाचार का पूरा अंदेशा है।

By Editor

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